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जलाओ मन का वो दीपक बहुत अंधेरा है।। कहीं है रात अंधेरे की कहीं सवेरा है।।
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एक तू ही तो है जी बोलती है जीने के लिए ,वरना पूरी दुनिया पीछे पड़ी है मारने के लिए।।
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लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती और हिम्मत करने वालो की हार नहीं होती
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